rediff ILAND
Welcome Guest, | Create your own iLand| Sign In  | New User? Get Started
BLOGS
iLand
Blogs
Friends/Contributors
Guestbook  
 
Shreya Tiwari
Categories
Poetry
Science
Religion
Writing
Movies
Blogs
My Top Posts
For My Girl Frie...
Definition of Po...
For Unknown Girl...
For Politics...
Why My India is ...
My Loving Mother...
Bharat Ka Bachpa...
Poem for parents...
Betiyan......!!...
Ohh Mother !!...
Favourites 8
Hina Rizvi
Shri Krishna
Swati Shukla
Asha
Inder Vig
Shashi
Ranjit Singh
Yatendra Kumar
What is an RSS feed?
RSS Feed 
shreya78.rediffiland.com/  
Friday 3 July, 2009
 12:11 | 28/Sep/2008 |  106 Comment(s)
  Add Shreya Tiwari as Friend     Write to Shreya Tiwari     Forward this link
Wake - Up Indians.....!!

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
मै सबको खुश करने यहाँ नही आया ,
ना रामायण  वेद सुनाने को  आया । 
कैसे चोट दिखा  दूँ  मै अपने तन की ,
किससे बांटू मै पीड़ा  अंतर्मन की ।   
 
- खून बह रहा भारत माँ के बेटों का ,
मरहम नहीं है दिल्ली की उन चोटों का
कौन हैं वो ? जो देश का रक्त बहाते हैं ,
कौन हैं ? जो बालक अनाथ कर जाते हैं
कौन हैं वोमाँ की गोदें सूनी करते ,
कौन हैं वो ? जो कोई दया नहीं रखते
इंसानो  का  खून  बहाते   जेहादी ,
कौन सा मज़हब देता है ये आज़ादी
 
सहमी आँखें रोती हैं पीड़ित - जन की ,
किससे बांटू मै पीड़ा  अंतर्मन की ।
 
- क्यों सब ऐसे हाथ पे हाथ धरे बैठे ,
क्यो  सब  ऐसे  वार्ताओं में हैं बैठे
देश के नेता  भाषण  के  खाते गोते ,
काश के मरने वालों में वो ख़ुद होते । 
तब उनको वो दर्द समझ में जाता ,
फिर कोई कानून बनाया ही जाता
ये  हैं  जिम्मेदार  खून  की होली  के,
यही  लुटेरे  हर दुल्हन की डोली के । 
 
भीख मांगती धरती आज समर्पण की ,
किससे बांटू मै पीड़ा  अंतर्मन की ।
 
- ऐसे जीने से मै मौत सराहूँगा ,
अपने जैसे ही दस-बीस बनाऊंगा
वतन की खातिर जो मिटटी में मिल जाएँ ,
मानव- बम बनकर संसद में फट जाएँ
जब दिल्ली के नेता सब मर जायेंगे ,
सच मानो हम तब ही खुश रह पायेंगे
और इस खातिर देनी होगी कुर्बानी ,
"मै भी हूँ तैयार" आवाजें है आनी ।
 
सिखलानी परिभाषा दीवानेपन की ,
किससे बांटू मै पीड़ा  अंतर्मन की ।  
 
------श्रेय तिवारी , मुंबई

Category: Poetry | Permalink